Avadhuta Gita Hindi Pdf -

एक आत्मज्ञानी व्यक्ति के लिए सब कुछ एक ही है—चाहे वह अपना शरीर हो या पराया, पुरुष हो या स्त्री।

‘तत्त्वमसि’ जैसे वाक्यों से जो उपदेश कल्पित किया गया है, न मैं वह हूँ, न अन्य—जो सत्य है, वह परम ‘मैं’ ही हूँ। avadhuta gita hindi pdf

अवधूत गीता, अद्वैत वेदांत (Non-Dualism) का एक अत्यंत प्रामाणिक और गहरा ग्रंथ है। यह ग्रंथ भगवान दत्तात्रेय द्वारा रचित माना जाता है। यदि श्रीमद्भगवद्गीता 'कर्म योग' और जीवन जीने की कला सिखाती है, तो अवधूत गीता सीधे 'ज्ञान योग' और 'स्वरूप की पहचान' से जुड़ी है। न मैं वह हूँ

एक आत्मज्ञानी व्यक्ति के लिए सब कुछ एक ही है—चाहे वह अपना शरीर हो या पराया, पुरुष हो या स्त्री।

‘तत्त्वमसि’ जैसे वाक्यों से जो उपदेश कल्पित किया गया है, न मैं वह हूँ, न अन्य—जो सत्य है, वह परम ‘मैं’ ही हूँ।

अवधूत गीता, अद्वैत वेदांत (Non-Dualism) का एक अत्यंत प्रामाणिक और गहरा ग्रंथ है। यह ग्रंथ भगवान दत्तात्रेय द्वारा रचित माना जाता है। यदि श्रीमद्भगवद्गीता 'कर्म योग' और जीवन जीने की कला सिखाती है, तो अवधूत गीता सीधे 'ज्ञान योग' और 'स्वरूप की पहचान' से जुड़ी है।